क्या आप जानते हैं?
कामख्या देवी मंदिर भारत के सबसे रहस्यमय शक्तिपीठों में से एक है
शक्तिपीठ की पौराणिक मान्यता
मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती का गर्भाशय गिरा था।
बिना मूर्ति का मंदिर
यहाँ देवी की कोई प्रतिमा नहीं है, बल्कि योनि-आकार की पवित्र शिला है।
देवी का वार्षिक रजस्वला काल
हर साल जून महीने में अंबुबाची मेला देवी के मासिक धर्म का प्रतीक माना जाता है।
तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र
कामख्या मंदिर को तांत्रिक साधना का बड़ा केंद्र माना जाता है।
पशु बलि की परंपरा
यहाँ आज भी बकरी की बलि देवी को अर्पित की जाती है।
कभी न सूखने वाला जल स्रोत
पवित्र शिला से सालभर जल का रिसाव होता रहता है।
दुनिया भर से श्रद्धालु
अंबुबाची मेले के समय लाखों श्रद्धालु यहाँ आते हैं।
अघोरी और तांत्रिकों का तीर्थ
देशभर के तांत्रिक साधक यहाँ साधना करने आते हैं।
रहस्यमयी गुफाएं और सुरंगें
मंदिर परिसर की कई गुफाएं आज भी रहस्य बनी हुई हैं।