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ताजिकिस्तान एयरबेस से भारत की वापसी? 5 बड़े रणनीतिक मोड़ के FACTS!

भारत ने ताजिकिस्तान स्थित Ayni Airbase से अपनी सैन्य उपस्थिति समाप्त कर दी है, जो उसका एकमात्र विदेशी सैन्य ठिकाना था।

भारत ने ताजिकिस्तान स्थित Ayni Airbase से अपनी सैन्य उपस्थिति समाप्त कर दी है, जो उसका एकमात्र विदेशी सैन्य ठिकाना था। 2002 में रूस-ताजिकिस्तान-भारत सहयोग से विकसित यह एयरबेस अफगानिस्तान सीमा के पास रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण था, जहाँ पर भारत ने MiG-29 लड़ाकू विमान तैनात किए थे।

भारतीय वापसी के फैसले के पीछे बदलता भू-राजनीतिक दबाव, रूस-चीन प्रभाव का बढ़ना, और अफगानिस्तान की अस्थिर सुरक्षा स्थिति प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। इसके साथ ही भारत अब इंडो-पैसिफिक रणनीति, समुद्री सुरक्षा, और Act East Policy पर अधिक फोकस कर रहा है।

Ayni Airbase से हटना निश्चित रूप से मध्य एशिया में भारत की सैन्य पहुंच को सीमित करेगा, लेकिन नई नीति के तहत भारत अब क्षेत्र में कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को प्राथमिकता दे रहा है। यह कदम भारत की व्यापक विदेश नीति बदलाव का संकेत देता है, जिसमें सैन्य तैनाती की बजाय बहुपक्षीय सहयोग पर जोर है।