समुद्र में डूबी श्री कृष्ण की द्वारका नगरी के रहस्यमयी तथ्य
भारत की पौराणिक कथाओं और ऐतिहासिक रहस्यों में एक नाम बार-बार सामने आता है – द्वारका नगरी। द्वारका को भगवान श्री कृष्ण की नगरी कहा जाता है। महाभारत के अनुसार, श्री कृष्ण ने मथुरा छोड़कर समुद्र किनारे एक भव्य और सुरक्षित नगरी बसाई थी जिसे आज हम द्वारका के नाम से जानते हैं।
कहा जाता है कि यह नगरी समय के साथ समुद्र में समा गई। लेकिन आधुनिक काल में जब पुरातत्व और समुद्र विज्ञान ने इस पर शोध किया तो कई आश्चर्यचकित करने वाले तथ्य सामने आए।
आइए जानते हैं समुद्र के अंदर डूबी श्री कृष्ण की द्वारका नगरी की 10 ऐसी बातें जो आपको हैरान कर देंगी।

1. द्वारका का उल्लेख महाभारत और पुराणों में
महाभारत के अनुसार, श्री कृष्ण ने अपने परिवार और प्रजाजनों को सुरक्षित रखने के लिए द्वारका नगरी बसाई थी। इसे समुद्र तट पर सात बार बनाया गया और छह बार समुद्र में डूबने के बाद सातवीं द्वारका लंबे समय तक बसी रही।
2. समुद्र के नीचे मिली पुरानी बस्तियां
गुजरात के तट पर हुए समुद्री सर्वेक्षण में समुद्र के नीचे दीवारें, पत्थर की संरचनाएं और मंदिर जैसी आकृतियां मिली हैं। इन खोजों से यह संकेत मिलता है कि हजारों साल पहले यहां एक विशाल नगरी मौजूद थी।
3. द्वारका की उम्र – हजारों साल पुरानी
पुरातत्वविदों का मानना है कि समुद्र के नीचे मिली संरचनाएं लगभग 9000 साल पुरानी हो सकती हैं। अगर यह सच है, तो यह मानव सभ्यता की सबसे प्राचीन बस्तियों में से एक है।
4. सोने और चांदी की वस्तुएं
समुद्र के भीतर किए गए शोधों में सोने, चांदी और तांबे के आभूषणों के टुकड़े भी मिले हैं। यह दर्शाता है कि उस समय द्वारका एक समृद्ध और व्यापारिक रूप से विकसित नगरी रही होगी।
5. श्री कृष्ण से गहरा संबंध
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वारका वही जगह है जहां श्री कृष्ण ने अपना जीवन व्यतीत किया और महाभारत के युद्ध के बाद यहां राज किया। यहां के मंदिर और संरचनाएं आज भी उनकी गाथा बयां करती हैं।
6. आधुनिक पुरातत्व विभाग की खोज
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और समुद्री पुरातत्व संस्थान ने 1980 के दशक में जब समुद्र के अंदर गोताखोरी की, तब उन्हें मूर्तियां, दीवारें और नगर योजना जैसे अवशेष मिले। इन खोजों ने द्वारका की ऐतिहासिकता को और मजबूत किया।
7. समुद्र में डूबने का कारण
कहा जाता है कि यदुवंश के अंत के बाद श्री कृष्ण ने द्वारका छोड़ दी थी। उनके स्वर्गवास के बाद, नगरी धीरे-धीरे समुद्र में समा गई। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह समुद्र स्तर बढ़ने की वजह से हुआ।
8. सात द्वारका का रहस्य
कथाओं के अनुसार, द्वारका सात बार बसी और छह बार समुद्र में समा गई। सातवीं द्वारका आज भी गुजरात में मौजूद है और इसे आधुनिक द्वारका कहा जाता है। यहां द्वारकाधीश मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है।
9. श्री कृष्ण का निवास स्थल
समुद्री पुरातत्वविदों का मानना है कि जो संरचनाएं समुद्र के अंदर मिली हैं, वे संभवतः महलों और मंदिरों के अवशेष हो सकते हैं। माना जाता है कि यह वही स्थान है जहां श्री कृष्ण का भव्य महल था।
10. धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहर
द्वारका नगरी सिर्फ एक पुरानी बस्ती नहीं है, बल्कि यह धार्मिक आस्था, इतिहास और पुरातत्व का अद्भुत संगम है। आज भी यह स्थान दुनिया भर के शोधकर्ताओं और श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करता है।
निष्कर्ष
समुद्र के अंदर डूबी श्री कृष्ण की द्वारका नगरी आज भी एक अद्भुत रहस्य है। यह नगरी केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं बल्कि भारत के गौरवशाली इतिहास और प्राचीन सभ्यता का प्रमाण भी है। यह कहना गलत नहीं होगा कि द्वारका भारत की संस्कृति और अध्यात्म की धरोहर है।
FAQs – समुद्र के अंदर डूबी श्री कृष्ण की द्वारका नगरी
Q1. द्वारका नगरी कहाँ स्थित है?
Ans- द्वारका गुजरात राज्य के पश्चिमी तट पर स्थित है और इसका कुछ हिस्सा समुद्र में डूबा हुआ है।
Q2. क्या वास्तव में द्वारका समुद्र में डूब गई थी?
Ans- हाँ, धार्मिक ग्रंथों और आधुनिक शोधों दोनों से यही संकेत मिलता है कि यह नगरी समुद्र में समा गई थी।
Q3. पुरातत्व विभाग को समुद्र के नीचे कौन-कौन सी वस्तुएं मिली हैं?
Ans- पुरातत्त्व विभाग को समुद्र के नीचे ऊंची दीवारें, मंदिरों की संरचनाएं, पाषाण युग के बर्तन और आभूषण मिले है।
Q4. वैज्ञानिकों के अनुसार द्वारका की उम्र कितनी पुरानी मानी जाती है?
Ans- वैज्ञानिकों के अनुसार, समुद्र के नीचे मिली संरचनाएं लगभग 9000 वर्ष पुरानी मानी जाती हैं।
Q5. वर्तमान समय की आधुनिक द्वारका कहाँ स्थित हैं?
Ans- आज की आधुनिक द्वारका गुजरात में स्थित है। यहाँ भगवान श्री कृष्ण का प्रसिद्ध द्वारकाधीश मंदिर हैं।
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